आत्मनिर्भरता से आतंकवाद तक — संसद में गूंजा विकास, सुरक्षा और किसानों का विजन
Swaraj Times Desk: नई दिल्ली, 28 जनवरी 2026: संसद के बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई, जिसमें उन्होंने पिछले दशक की उपलब्धियों, सुरक्षा मजबूती और आत्मनिर्भर भारत के विजन को रेखांकित किया। राष्ट्रपति ने गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “आजादी तब तक अधूरी है, जब तक नागरिक आत्मनिर्भर जीवन नहीं जीते।”
उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में तेज प्रगति की है और देश की अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत हुई है। महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने का लाभ सीधे मध्यम वर्ग और गरीबों तक पहुंचा है।
आतंकवाद और सुरक्षा पर सख्त संदेश
राष्ट्रपति मुर्मू ने सुरक्षा के मुद्दे पर स्पष्ट कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक रुख अपनाए हुए है। उन्होंने हालिया सैन्य कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त किया गया है और भविष्य में भी किसी भी हमले का जवाब कठोर और निर्णायक होगा।
माओवाद पर भी उन्होंने सरकार की सफलता गिनाई। उनके अनुसार, एक समय 100 से ज्यादा जिलों में फैला माओवादी प्रभाव अब सिमटकर केवल कुछ जिलों तक रह गया है। हजारों उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है।
विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा पर जोर
राष्ट्रपति ने बताया कि भारत सौर ऊर्जा उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है और लाखों घर अब बिजली पैदा करने में सक्षम हो रहे हैं। उत्तर-पूर्व भारत में सड़क और रेल नेटवर्क के विस्तार से विकास की नई राह खुली है।
उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने और शिक्षा व छात्रवृत्ति योजनाओं से वंचित वर्गों को सशक्त करने की बात भी दोहराई।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस
राष्ट्रपति ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। PM किसान सम्मान निधि के तहत बड़ी राशि सीधे किसानों के खातों में भेजी जा चुकी है। पशुपालन, मत्स्यपालन और मधुमक्खी पालन को ग्रामीण आय बढ़ाने के साधन के रूप में प्रोत्साहित किया जा रहा है। फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
महिला सशक्तिकरण बना विकास का आधार
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने की मुहिम तेज हुई है। लाखों महिलाएं अब “लखपति दीदी” बन चुकी हैं और नई योजनाएं उन्हें तकनीकी और कृषि क्षेत्रों से भी जोड़ रही हैं।
राष्ट्रपति का संदेश साफ था — सुरक्षित, आत्मनिर्भर और समावेशी भारत ही विकसित भारत की असली पहचान बनेगा।
