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India-US Trade Deal: नमस्ते-हाउडी की दोस्ती या दबाव की डिप्लोमेसी? डील पर सियासत गरम

Swaraj Times Desk: भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने इस डील पर तीखा हमला बोलते हुए केंद्र सरकार की विदेश और व्यापार नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यह समझौता जितना बताया जा रहा है, उससे कहीं ज्यादा जटिल और भारत के हितों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

तेल आयात और विदेश नीति पर सवाल

जयराम रमेश ने दावा किया कि समझौते के बाद भारत के रूस से तेल आयात को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। उनके मुताबिक, अमेरिका की शर्तें भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वतंत्र विदेश नीति पर दबाव डालने जैसी हैं। कांग्रेस का तर्क है कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों पर बाहरी दबाव स्वीकार नहीं करना चाहिए।

किसान हितों पर चिंता

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस डील के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में ज्यादा छूट मिल सकती है। इससे घरेलू किसानों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। रमेश ने कहा कि अगर आयात शुल्क कम होते हैं तो सस्ते विदेशी उत्पाद भारतीय कृषि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकते हैं, जिसका सीधा असर छोटे किसानों पर पड़ेगा।

व्यापार संतुलन बदलने का दावा

रमेश ने यह भी कहा कि अमेरिका से भारत का आयात तेजी से बढ़ सकता है, जिससे व्यापार संतुलन बिगड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि यदि निर्यात की तुलना में आयात ज्यादा बढ़ा, तो भारत का ट्रेड सरप्लस घट सकता है।

आईटी और सेवा क्षेत्र पर अनिश्चितता

भारत के सेवा क्षेत्र, खासकर आईटी उद्योग को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश का कहना है कि इस डील में भारतीय आईटी पेशेवरों और सेवा निर्यात को लेकर स्पष्ट गारंटी नजर नहीं आती। इससे टेक सेक्टर में काम करने वाले युवाओं और कंपनियों के भविष्य को लेकर असमंजस पैदा हो सकता है।

राजनीतिक तंज भी जारी

अपने बयान के आखिर में जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि बड़ी-बड़ी दोस्ती की तस्वीरों से ज्यादा मायने ठोस नीतिगत फायदे रखते हैं। उनका इशारा भारत-अमेरिका नेतृत्व के सार्वजनिक कार्यक्रमों की ओर था।

अब इस डील को लेकर सियासत और तेज होने के संकेत हैं। एक तरफ सरकार इसे ऐतिहासिक अवसर बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे सावधानी से देखने की सलाह दे रहा है।

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