दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार के बावजूद क्यों कमजोर है वेनेजुएला की करेंसी?
Swaraj Times Desk: हाल ही में अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़े तनाव और राष्ट्रपति Nicolás Maduro से जुड़े घटनाक्रम के बाद वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है. लेकिन राजनीतिक हलचल के साथ-साथ एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडार वाला देश आर्थिक रूप से इतना कमजोर क्यों है. खासकर तब, जब उसकी मुद्रा की तुलना भारत जैसे देशों से की जाती है.
वेनेजुएला की करेंसी क्यों टूटी?
वेनेजुएला की मुद्रा को बोलिवर (VES) कहा जाता है. बीते एक दशक में यह दुनिया की सबसे ज्यादा अवमूल्यन झेलने वाली मुद्राओं में शामिल रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह देश में बेकाबू महंगाई, सरकारी कुप्रबंधन और लगातार बनी राजनीतिक अस्थिरता है.
2017 में वेनेजुएला के आधिकारिक रूप से डिफॉल्ट घोषित होने के बाद विदेशी निवेश लगभग खत्म हो गया. इसके अलावा अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी. सरकारी तेल कंपनी की खराब हालत और तेल उत्पादन में भारी गिरावट ने हालात को और बिगाड़ दिया.
आम लोगों पर क्या असर पड़ा?
बोलिवर की कमजोरी का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ा है. रोजमर्रा की चीजें खरीदने के लिए लोगों को मोटी रकम कैश में चुकानी पड़ती है. कई बार एक ही दिन में कीमतें कई बार बदल जाती हैं. इसी वजह से वेनेजुएला में अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं का चलन बढ़ गया है और स्थानीय करेंसी पर भरोसा घटता जा रहा है.
भारत के 10,000 रुपये = वेनेजुएला में कितने?
करेंसी वैल्यू की बात करें तो हालिया अनुमानों के मुताबिक:
1 भारतीय रुपया ≈ 3.38 वेनेजुएला बोलिवर
इस हिसाब से अगर कोई भारतीय नागरिक वेनेजुएला जाए, तो उसके 10,000 रुपये लगभग 33,800–34,000 बोलिवर के बराबर होंगे. हालांकि यह दर स्थिर नहीं रहती. वेनेजुएला में करेंसी रेट अक्सर राजनीतिक घटनाओं और बाजार की स्थिति के हिसाब से तेजी से बदलते रहते हैं.
तेल होने के बावजूद संकट क्यों?
अक्सर लोग पूछते हैं कि जब वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, तो फिर आर्थिक बदहाली क्यों? इसकी वजह है कि वहां का कच्चा तेल भारी और गाढ़ा है, जिसे निकालना और रिफाइन करना बेहद महंगा पड़ता है. ऊपर से पुरानी तकनीक, निवेश की कमी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने तेल से होने वाली कमाई को सीमित कर दिया है.
भारत–वेनेजुएला संबंध
इसके बावजूद भारत और वेनेजुएला के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं. भारत ने हाल के वर्षों में वेनेजुएला से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात किया है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम माना जाता है.
कुल मिलाकर, वेनेजुएला का उदाहरण बताता है कि प्राकृतिक संसाधन होना ही किसी देश की आर्थिक मजबूती की गारंटी नहीं होता.
