RBI के ताजा आंकड़ों में खुलासा, रुपये की स्थिरता और निवेशकों के भरोसे को मिला बड़ा सहारा
Swaraj Times Desk: भारत की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. देश के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर मजबूत बढ़त दर्ज की गई है. Reserve Bank of India (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 26 दिसंबर को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 3.293 बिलियन डॉलर बढ़कर 696.610 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है.
इससे एक सप्ताह पहले भी भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 4.368 बिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह 693.318 बिलियन डॉलर पर पहुंचा था. लगातार दूसरे सप्ताह आई यह मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स की ओर इशारा करती है.
फॉरेन करेंसी एसेट्स में भी बढ़ोतरी
RBI के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा माने जाने वाले फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में भी इजाफा हुआ है. FCA की वैल्यू 184 मिलियन डॉलर बढ़कर 559.612 बिलियन डॉलर हो गई. FCA में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की वैल्यू में उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल रहता है. इसका मतलब है कि वैश्विक करेंसी मूवमेंट के बावजूद भारत की स्थिति संतुलित बनी हुई है.
गोल्ड रिजर्व ने दिखाई चमक
इस हफ्ते सोने के भंडार में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला. भारत का गोल्ड रिजर्व 2.956 बिलियन डॉलर बढ़कर 113.32 बिलियन डॉलर हो गया है. वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में तेजी इसका एक बड़ा कारण मानी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना फिलहाल करीब 4400 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जिससे भारत के कुल रिजर्व को अतिरिक्त मजबूती मिली है.
SDR और IMF रिजर्व पोजीशन में भी सुधार
समीक्षाधीन सप्ताह में भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) भी 60 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.803 बिलियन डॉलर हो गए. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत की रिजर्व स्थिति 93 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.875 बिलियन डॉलर पर पहुंच गई.
क्यों अहम है विदेशी मुद्रा भंडार?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक ताकत का पैमाना होता है. इससे आयात भुगतान, विदेशी कर्ज की अदायगी, रुपये की स्थिरता और बाजार में भरोसा बनाए रखने में मदद मिलती है. मजबूत फॉरेक्स रिजर्व से विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ता है और देश की अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाने की क्षमता भी मजबूत होती है
