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पाकिस्तान की दोहरी नीति पर संयुक्त राष्ट्र में भारत का करारा जवाब, कूटनीति से दिया कड़ा संदेश

Swaraj Times Desk: संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को साफ और सख्त संदेश दिया है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह खत्म नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि पर किसी भी तरह की ढील की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन हकीकत यह है कि वह लगातार आतंकवाद को संरक्षण देता रहा है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि दुनिया अब इस दोहरे चरित्र को समझ चुकी है और आतंकवाद को “न्यू नॉर्मल” के रूप में पेश करने की कोशिश कभी स्वीकार नहीं की जाएगी।

हरीश ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत ने दशकों पहले सिंधु जल संधि सद्भावना और शांति की भावना से की थी, लेकिन पाकिस्तान ने विश्वास की उस भावना को बार-बार कमजोर किया। उन्होंने साफ किया कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। जब तक आतंकी ढांचे पर निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, तब तक संबंध सामान्य होने की उम्मीद बेमानी है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक विषय है और पाकिस्तान को इस पर बयान देने का कोई अधिकार नहीं है। भारत ने कहा कि बार-बार झूठे आरोप लगाकर ध्यान भटकाने की कोशिश अब काम नहीं आएगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझना होगा कि असली मुद्दा आतंकवाद है, न कि भारत की आंतरिक नीतियां।

भारत के इस रुख को कूटनीतिक हलकों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संदेश साफ है—पहले आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई, फिर ही किसी भी समझौते या सहयोग की बात।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान सिर्फ पाकिस्तान के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए संकेत है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दे पर किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है। आने वाले समय में यह रुख भारत की विदेश नीति की दिशा को और स्पष्ट कर सकता है।

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