Swaraj Times Desk: H-1B Visa Rule Change: अब किस्मत नहीं, सैलरी और स्किल तय करेगी अमेरिका का वर्क वीजा
अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा नियमों में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए सालों से चले आ रहे रैंडम लॉटरी सिस्टम को खत्म कर दिया है. इसकी जगह अब ‘वेटेड सिलेक्शन सिस्टम’ लागू किया जाएगा, जिसमें किस्मत नहीं बल्कि सैलरी और स्किल लेवल तय करेगा कि किसे अमेरिका में काम करने का मौका मिलेगा.
क्या है नया H-1B वेटेड सिलेक्शन सिस्टम?
अब तक H-1B वीजा के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित लॉटरी से होता था. लेकिन नए नियमों के तहत यह प्रक्रिया पूरी तरह बदल दी गई है. अब वीजा चयन सैलरी-आधारित वेटेज सिस्टम से होगा.
US डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और USCIS द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार:
- वीजा चयन रैंडम नहीं बल्कि वेटेड होगा
- ज्यादा सैलरी वाले जॉब ऑफर को अधिक प्राथमिकता मिलेगी
- डिपार्टमेंट ऑफ लेबर के तय 4 वेज लेवल्स के आधार पर एंट्री दी जाएगी
- सबसे ऊंचे वेज लेवल को 4 गुना ज्यादा मौका, सबसे निचले को सिर्फ 1 मौका
हालांकि H-1B वीजा की सालाना सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है. पहले की तरह कुल 85,000 वीजा (65,000 जनरल और 20,000 मास्टर्स डिग्री होल्डर्स) ही जारी किए जाएंगे.
ट्रंप प्रशासन ने क्यों लिया यह फैसला?
USCIS के अनुसार, पुराना लॉटरी सिस्टम कंपनियों द्वारा गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा था. कई कंपनियां एंट्री-लेवल पद दिखाकर कम सैलरी पर विदेशी कर्मचारियों को हायर कर रही थीं, जिससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों और वेतन पर असर पड़ रहा था.
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि नया सिस्टम ‘अमेरिका फर्स्ट’ पॉलिसी के अनुरूप है और इससे:
- अमेरिकी वर्कर्स की सैलरी सुरक्षित होगी
- हाई-स्किल्ड टैलेंट को बढ़ावा मिलेगा
- कम सैलरी पर विदेशी लेबर लाने की प्रवृत्ति रुकेगी
भारतीय प्रोफेशनल्स पर क्या पड़ेगा असर?
H-1B वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय प्रोफेशनल्स ही रहे हैं. लेकिन इस बदलाव का असर दो हिस्सों में बंटेगा:
नुकसान किसे होगा?
- फ्रेशर्स और एंट्री-लेवल भारतीय प्रोफेशनल्स
- कम सैलरी वाले IT और टेक जॉब्स
- आउटसोर्सिंग-आधारित कंपनियों के कर्मचारी
फायदा किसे मिलेगा?
- हाई-स्किल्ड और एक्सपीरियंस्ड प्रोफेशनल्स
- सीनियर टेक, AI, डेटा साइंस और क्लाउड एक्सपर्ट्स
- हाई-पेड जॉब ऑफर वाले उम्मीदवार
हाल के आंकड़ों के मुताबिक, अमेजन, TCS, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एप्पल जैसी कंपनियां H-1B की सबसे बड़ी यूजर्स रही हैं. लेकिन अब कंपनियों को भी ज्यादा सैलरी ऑफर करनी पड़ेगी, तभी उनके उम्मीदवारों की संभावना बढ़ेगी.
कब से लागू होंगे नए नियम?
यह नया H-1B वीजा नियम 27 फरवरी 2026 से लागू होगा और फिस्कल ईयर 2027 के रजिस्ट्रेशन सीजन से इसकी शुरुआत होगी.
निष्कर्ष
H-1B वीजा में यह बदलाव भारतीय युवाओं के लिए एक बड़ा संकेत है कि अब अमेरिका में काम करने के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि हाई स्किल और हाई वैल्यू भी जरूरी होगी. अमेरिका का सपना खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अब उसका रास्ता पहले से कहीं ज्यादा कठिन और प्रतिस्पर्धी हो गया है.
