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Priyanka Chaturvedi StatementPriyanka Chaturvedi Statement

Israel Iran War: प्रियंका चतुर्वेदी ने पीएम मोदी के भाषण का स्वागत करते हुए कहा कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा और स्टॉक रिजर्व के लिए और तैयार रहना चाहिए।

Swaraj Times Desk: मिडिल ईस्ट में जारी इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा संबोधन पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री के भाषण का स्वागत किया, लेकिन साथ ही सरकार की तैयारी को लेकर सवाल भी उठाए।

‘PM के संबोधन का स्वागत, लेकिन…’

प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री के संबोधन का स्वागत करती हैं, लेकिन उनका मानना है कि सरकार को युद्ध शुरू होने के एक सप्ताह के भीतर ही देश की जनता को स्पष्ट रूप से आश्वस्त करना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर पहले से बेहतर तैयारी और स्टॉक रिजर्व की व्यवस्था होनी चाहिए थी, ताकि संकट की स्थिति में देश पर असर कम पड़े।

भारत पर पड़ रहा है युद्ध का असर

उन्होंने यह भी कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है, ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी था कि देश इस संकट से निपटने के लिए कितना तैयार है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने उम्मीद जताई कि स्थिति और ज्यादा नहीं बिगड़ेगी और सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे।

PM मोदी ने संसद में क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भारत के लिए अप्रत्याशित चुनौतियां लेकर आया है। उन्होंने जोर दिया कि इस मुद्दे पर देश को एकजुट रहना होगा और संसद से एक मजबूत संदेश दुनिया तक जाना चाहिए।

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को बाधित करना और वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बातचीत और कूटनीति को ही इस संकट का समाधान बताया।

किसानों और अर्थव्यवस्था को लेकर आश्वासन

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश के किसानों को भी आश्वस्त किया कि सरकार हर परिस्थिति में उनकी मदद के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी कठिन परिस्थितियों का सामना कर चुका है और इस बार भी मजबूती से खड़ा रहेगा।

बढ़ी राजनीतिक चर्चा

मिडिल ईस्ट संकट को लेकर अब देश के भीतर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक तरफ सरकार स्थिति को नियंत्रण में बताने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष तैयारी और रणनीति को लेकर सवाल उठा रहा है।

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