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Raj Thackeray News: RSS प्रमुख की टिप्पणी पर MNS प्रमुख भड़के, बोले– भाषाई अस्मिता को कम मत आंकिए

Swaraj Times Desk: महाराष्ट्र की राजनीति में भाषा का मुद्दा फिर गरमा गया है। RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुंबई में हुए एक कार्यक्रम में भाषा आधारित आंदोलनों को लेकर की गई टिप्पणी पर राज ठाकरे ने सोशल मीडिया के जरिए खुलकर असहमति जताई।

राज ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि भाषाई आग्रह को “बीमारी” बताना इतिहास की अनदेखी है। उनके मुताबिक, भारत में राज्यों का भाषाई आधार पर पुनर्गठन कोई शौक से नहीं, बल्कि जनभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए हुआ था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अपनी भाषा और संस्कृति के लिए आवाज उठाना बीमारी है, तो यह “बीमारी” देश के कई राज्यों—जैसे कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, पश्चिम बंगाल और गुजरात—में भी मौजूद है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब बड़ी संख्या में बाहरी लोग किसी राज्य में बसते हैं और स्थानीय भाषा व संस्कृति को नजरअंदाज करते हैं, तो टकराव की स्थिति पैदा होती है। राज ठाकरे के अनुसार, यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, न कि कोई विकृति। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय अस्मिता की रक्षा करना लोकतांत्रिक अधिकार है।

RSS पर अप्रत्यक्ष राजनीति का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जो संगठन खुद को अराजनीतिक बताता है, वह अगर ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बयान देता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समरसता की बात करनी है, तो भाषाई विविधता का सम्मान करना होगा, न कि किसी एक भाषा को बढ़त देने की कोशिश।

राज ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संगठन हिंदुत्व के मुद्दों पर सक्रिय रहा है, लेकिन महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके मुताबिक, क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक स्वाभिमान को नजरअंदाज कर राष्ट्रीय एकता की बात करना अधूरा दृष्टिकोण है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में भाषा, रोजगार और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दे फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है।

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