Telangana High Court: गरीब महिला को सुनवाई का मौका न देने पर अदालत सख्त, सजा पर 4 हफ्ते की मोहलत
Swaraj Times Desk: तेलंगाना में न्यायपालिका की सख्ती का बड़ा उदाहरण सामने आया है। Telangana High Court ने मेदक जिले के कलेक्टर Rahul Raj को कोर्ट की अवमानना के मामले में 6 महीने की साधारण कारावास और 2,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। हालांकि अदालत ने अपील का अवसर देते हुए इस सजा को चार हफ्तों के लिए स्थगित भी कर दिया है।
यह फैसला जस्टिस के. लक्ष्मण की एकल पीठ ने सुनाया। मामला एक भूमि विवाद से जुड़ा था, जिसमें अदालत के आदेशों की कथित तौर पर अनदेखी की गई।
क्या था पूरा विवाद?
मेदक जिले के चेगुंटा मंडल के बोनाल गांव की निवासी 51 वर्षीय नल्लावेली लक्ष्मी ने दावा किया कि उनके दादा से विरासत में मिली 2.22 एकड़ जमीन का नामांतरण (म्यूटेशन) उनके नाम पर नहीं किया गया। जब उन्होंने प्रशासनिक फैसले को चुनौती दी, तो हाईकोर्ट ने जनवरी 2024 के आदेश को रद्द करते हुए नई जांच और दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के निर्देश दिए थे।
कोर्ट ने साफ कहा था कि पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए, नोटिस जारी हों और आपत्तियां सुनकर निर्णय लिया जाए। लेकिन आरोप है कि दिसंबर 2024 में कलेक्टर ने दोबारा लक्ष्मी का दावा खारिज कर दिया। रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता को विधिवत नोटिस नहीं मिला और सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया।
प्रशासन की ओर से व्हाट्सएप पर नोटिस भेजने का दावा किया गया, लेकिन इसका कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया जा सका। परिणामस्वरूप लक्ष्मी को फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालत ने इसे आदेशों की “जानबूझकर अवहेलना” माना। जस्टिस लक्ष्मण ने टिप्पणी की कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से ऐसी लापरवाही स्वीकार्य नहीं है, खासकर तब जब एक आम नागरिक—वह भी आर्थिक रूप से कमजोर—न्याय के लिए संघर्ष कर रही हो।
राज्यभर में चर्चा
भूमि विवादों में कोर्ट आदेशों की अनदेखी के मामले पहले भी सामने आए हैं, लेकिन किसी वरिष्ठ अधिकारी को जेल की सजा मिलना दुर्लभ है। 2015 बैच के आईएएस अधिकारी राहुल राज फिलहाल अपील की तैयारी में हैं।
अब नजर इस बात पर है कि ऊपरी अदालत में क्या फैसला आता है, लेकिन फिलहाल यह निर्णय प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायपालिका की सख्ती का बड़ा संदेश बन गया है।
