• Tue. Mar 10th, 2026

I-PAC छापेमारी में बाधा का आरोप, ममता सरकार पर ED ने लगाए गंभीर सवाल

Swaraj Times Desk: पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC से जुड़े छापेमारी मामले में अब सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल करते हुए पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को हटाने की मांग की है.

ED का आरोप है कि I-PAC के कार्यालय और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर की गई छापेमारी और तलाशी के दौरान राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने जानबूझकर जांच में बाधा डाली.

ED के गंभीर आरोप

नई याचिका में ED ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल के शीर्ष पुलिस अधिकारी, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर न केवल छापेमारी के दौरान एजेंसी के काम में रुकावट बने, बल्कि कथित तौर पर सबूतों को नष्ट या गायब करने में भी भूमिका निभाई.

ED ने अदालत से आग्रह किया है कि वह केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को निर्देश दे कि इन अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके.

राजीव कुमार पर विशेष आरोप

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि मौजूदा DGP राजीव कुमार, जब कोलकाता पुलिस कमिश्नर थे, तब उन्होंने ED और CBI की कार्रवाई के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ धरने में हिस्सा लिया था. ED का कहना है कि यह आचरण एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है.

गुरुवार को होगी अहम सुनवाई

इस मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. इसमें भी आरोप लगाया गया है कि I-PAC कार्यालय और प्रतीक जैन के घर पर हुई रेड के दौरान ED अधिकारियों को विरोध, दबाव और अवैध हस्तक्षेप का सामना करना पड़ा. यह सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार शर्मा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष होगी.

बंगाल सरकार भी सुप्रीम कोर्ट पहुंची

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की है. राज्य सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि उसका पक्ष सुने बिना कोई भी एकतरफा आदेश पारित न किया जाए.

इस केस को लेकर अब सवाल सिर्फ I-PAC की जांच तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह केंद्र और राज्य के बीच टकराव, पुलिस की निष्पक्षता और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता जैसे बड़े संवैधानिक मुद्दों तक पहुंच गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *