दही-चूड़ा भोज से सियासी संकेत तक, बिहार की राजनीति में फिर गरमाया ‘निशांत कुमार’ सवाल
Swaraj Times Desk: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है—क्या मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं? मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज और नेताओं की मुलाकातों के बीच यह चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है. इस मुद्दे पर जहां जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता उत्साह दिखा रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने तंज कसते हुए इसे ‘बार-बार उड़ाया जा रहा मजाक’ बताया है.
दही-चूड़ा भोज से उठा सियासी सवाल
गुरुवार को JDU विधायक चेतन आनंद के आवास पर आयोजित चूड़ा-दही भोज में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा की मौजूदगी ने सियासी हलचल बढ़ा दी. भोज के दौरान जब निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठा, तो मनीष वर्मा ने बयान देकर चर्चाओं को और हवा दे दी.
मनीष वर्मा का बड़ा बयान
मनीष वर्मा ने कहा कि निशांत कुमार पढ़े-लिखे, टैलेंटेड और युवा हैं. अगर वह राजनीति में आते हैं तो इससे न सिर्फ JDU को मजबूती मिलेगी, बल्कि बिहार की राजनीति भी समृद्ध होगी. उन्होंने दावा किया कि पार्टी के युवा नेता और कार्यकर्ता लंबे समय से निशांत के राजनीति में आने का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि वर्मा ने यह भी साफ किया कि यह पूरी तरह निशांत का निजी फैसला है और जब वह चाहेंगे, तभी राजनीति में कदम रखेंगे.
कांग्रेस ने कसा तंज
इस बयान के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी. कांग्रेस प्रवक्ता ने व्यंग्य करते हुए कहा कि निशांत कुमार को लेकर ढाई साल में 100 बार ऐसी चर्चाएं उठ चुकी हैं. उन्होंने कहा, “निशांत का मजाक मत बनाइए. अगर आना है तो साफ कहिए, नहीं आना है तो भी स्पष्ट कर दीजिए.” कांग्रेस का आरोप है कि JDU सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए बार-बार इस मुद्दे को उछाल रही है.
पहले भी उठ चुका है सवाल
यह पहली बार नहीं है जब निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री को लेकर अटकलें लगी हों. पिछले कुछ वर्षों में कई मौकों पर JDU नेताओं ने संकेत दिए, लेकिन खुद निशांत कुमार हमेशा राजनीति से दूरी बनाए हुए नजर आए हैं. उन्होंने अब तक किसी सार्वजनिक मंच से राजनीति में आने की इच्छा जाहिर नहीं की है.
बिहार की राजनीति में मायने
नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में लंबे समय से एक मजबूत चेहरा रहे हैं. ऐसे में अगर उनके बेटे की राजनीति में एंट्री होती है, तो इसे JDU में नेतृत्व के भविष्य और उत्तराधिकार की दिशा में बड़े संकेत के तौर पर देखा जाएगा. फिलहाल गेंद निशांत कुमार के पाले में है और बिहार की राजनीति उनकी ‘हां’ या ‘ना’ का इंतजार कर रही है.
