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Delhi Name Change: केरलम के बाद अब दिल्ली पर बहस तेज—क्या फिर लौटेगा महाभारत काल का नाम?

Swaraj Times Desk: हाल ही में Kerala का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद देशभर में नाम परिवर्तन की बहस तेज हो गई है। अब देश की राजधानी Delhi का नाम बदलने की मांग उठी है। बीजेपी सांसद Praveen Khandelwal ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को पत्र लिखकर दिल्ली का नाम “इंद्रप्रस्थ” करने का प्रस्ताव रखा है।

क्यों रखा गया ‘इंद्रप्रस्थ’ नाम का प्रस्ताव?

खंडेलवाल का तर्क है कि ‘दिल्ली’ नाम मध्यकालीन और औपनिवेशिक प्रभाव को दर्शाता है, जबकि ‘इंद्रप्रस्थ’ भारत की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उनका कहना है कि राजधानी को उसके ऐतिहासिक और पौराणिक गौरव से जोड़ना चाहिए।

महाभारत से जुड़ा है कनेक्शन

महाभारत के अनुसार, इंद्रप्रस्थ पांडवों द्वारा बसाई गई राजधानी थी, जो खांडवप्रस्थ वन को साफ कर स्थापित की गई थी। कई इतिहासकार मानते हैं कि वर्तमान दिल्ली का भू-भाग उसी प्राचीन नगर से मेल खा सकता है। पुराना किला क्षेत्र में हुई खुदाई में ऐसे अवशेष मिले हैं, जो हजारों वर्षों से यहां मानव बस्तियों के अस्तित्व की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, आधुनिक दिल्ली को सीधे इंद्रप्रस्थ से जोड़ने पर अभी भी इतिहासकारों के बीच मतभेद हैं।

दिल्ली के नाम का सफर

दिल्ली का इतिहास कई उतार-चढ़ाव से भरा है। इसे अलग-अलग शासकों ने बसाया और नए नाम दिए। इंद्रप्रस्थ, दिल्लिका, दहली, तुगलकाबाद, शाहजहानाबाद और नई दिल्ली जैसे नाम समय-समय पर प्रचलित रहे। अंततः ‘दिल्ली’ आधिकारिक और व्यापक रूप से स्वीकार्य नाम बन गया।

नाम बदलने की परंपरा

देश में पहले भी कई शहरों के नाम बदले जा चुके हैं—बॉम्बे से मुंबई, कलकत्ता से कोलकाता, मद्रास से चेन्नई और इलाहाबाद से प्रयागराज। समर्थकों का कहना है कि यह सांस्कृतिक पहचान की पुनर्स्थापना है, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक कदम मानते हैं।

अब सवाल यह है कि क्या दिल्ली सचमुच ‘इंद्रप्रस्थ’ बनेगी या यह प्रस्ताव केवल बहस तक सीमित रहेगा? फिलहाल, राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हैं।

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