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गणतंत्र दिवस पर सपा प्रमुख का तीखा प्रहार, बेरोजगारी से लेकर बुलडोजर राजनीति तक उठाए सवाल

Swaraj Times Desk: 77वें गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि 26 जनवरी केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि यह संकल्प लेने का अवसर है कि देश को संविधान के रास्ते पर चलाकर ही मजबूत बनाया जा सकता है.

अंतरराष्ट्रीय हालात पर चौंकाने वाला बयान

अखिलेश यादव ने वैश्विक राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया ऐसे दौर में पहुंच गई है, जहां “एक देश का राष्ट्रपति दूसरे देश के राष्ट्रपति को अपहरण कर ले जाए, यह कल्पना से भी परे था.” उन्होंने कहा कि दो देशों के बीच चार साल से युद्ध चल रहा है और शांति की सारी उम्मीदें जमीन के सवाल पर आकर खत्म हो जाती हैं. यह हालात बताते हैं कि दुनिया किस अस्थिर दिशा में जा रही है.

अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर सवाल

सपा प्रमुख ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भी अर्थव्यवस्था की बात होती है, तो प्रदूषण की सच्चाई सामने आ जाती है. उन्होंने आरोप लगाया कि अखबारों में पानी में यूरेनियम, आर्सेनिक और मरकरी जैसी जहरीली चीजों की खबरें छप रही हैं. निजी कंपनियों को यह सब पता है, लेकिन सरकार आंख मूंदे बैठी है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत को “सोने की चिड़िया” बनाने के विज्ञापन दिए जा रहे हैं, जबकि आज सोने की कीमत आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुकी है.

पीडीए समाज और बेरोजगारी का मुद्दा

अखिलेश यादव ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज पर अन्याय का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है. बेरोजगारी इस कदर बढ़ चुकी है कि कितनी भी डिग्रियां हासिल कर ली जाएं, नौकरी नहीं मिल रही. उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया था, लेकिन आज किसान अपनी ही फसल का सही दाम पाने के लिए संघर्ष कर रहा है.

बुलडोजर और विरासत की राजनीति पर हमला

उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जहां संरक्षण होना चाहिए, वहां बुलडोजर चलाया जा रहा है. शंकराचार्यों और पौराणिक धरोहरों को संकट में डाल दिया गया है, जो लोकतंत्र और आस्था दोनों के लिए खतरनाक संकेत है.

वोट और नागरिकता पर चेतावनी

अखिलेश यादव ने वोट के अधिकार को लेकर कहा कि जो लोग चुनाव हारने लगे हैं, वे अब एसआईआर के नाम पर एनआरसी लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि वोट कटने का मतलब नागरिकता पर सीधा सवाल खड़ा होना है. संविधान कहता है कि जो नागरिक है, उसे वोट का अधिकार है, इसलिए जनता को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है.

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