Swaraj Times Desk: अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की ताज़ा रिपोर्ट ने एशिया की सुरक्षा तस्वीर को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक चीन भारत को रणनीतिक रूप से घेरने की दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है. इस योजना के तहत ड्रैगन भारत के चारों ओर स्थित देशों—पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार—में सैन्य ठिकाने या लॉजिस्टिक्स सुविधाएं विकसित करने की कोशिश कर रहा है. इसे विशेषज्ञ चीन की कुख्यात ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का अगला चरण मान रहे हैं.
भारत के आसपास सैन्य घेरा मजबूत कर रहा चीन
पेंटागन की रिपोर्ट बताती है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती. वह समुद्र, जमीन और आसमान—तीनों मोर्चों पर अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए भारत के पड़ोसी देशों में आधारभूत सैन्य ढांचा तैयार कर रही है. इन ठिकानों से चीन को लंबी दूरी तक सैन्य संचालन, रसद आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा में मदद मिलेगी.
पाकिस्तान से गहराता सैन्य गठजोड़
पाकिस्तान पहले से ही चीन का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार है. ग्वादर पोर्ट को चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का अहम हिस्सा बनाया गया है, जिसे भविष्य में नौसैनिक अड्डे के रूप में विकसित किया जा सकता है. चीन ने पाकिस्तान को J-10C फाइटर जेट्स, हैंगोर क्लास सबमरीन और युद्धपोत दिए हैं. इसके अलावा JF-17 फाइटर जेट्स का संयुक्त निर्माण भी चल रहा है, जो भारत के लिए सीधी सैन्य चुनौती है.
बांग्लादेश में बढ़ती चीनी दिलचस्पी
रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में भी चीन सैन्य ठिकानों की संभावनाएं तलाश रहा है. बांग्लादेश ने चीनी हथियारों में रुचि दिखाई है और पहले ही चीन से टैंक, सबमरीन और युद्धपोत हासिल कर चुका है. इससे बंगाल की खाड़ी में भारत की सामरिक स्थिति पर असर पड़ सकता है.
श्रीलंका और म्यांमार की रणनीतिक अहमियत
श्रीलंका और म्यांमार में चीन लॉजिस्टिक्स बेस या सीमित सैन्य सुविधाएं विकसित कर सकता है. ये ठिकाने सीधे युद्ध के लिए नहीं, बल्कि PLA की समुद्री और हवाई मौजूदगी को बनाए रखने के लिए अहम होंगे. खासकर हिंद महासागर में चीन की पकड़ मजबूत करने में ये देश अहम भूमिका निभा सकते हैं.
चीन को किन बातों की चिंता
पेंटागन रिपोर्ट बताती है कि चीन मलक्का स्ट्रेट को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित है, जहां से उसका अधिकांश व्यापार गुजरता है. अमेरिका और भारत की नौसेनाओं से संभावित घेराबंदी का डर चीन को वैकल्पिक समुद्री मार्ग और सैन्य ठिकाने बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है.
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन की ये गतिविधियां भारत की सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना सकती हैं. हालांकि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और इंडो-पैसिफिक में सहयोग चीन के लिए संतुलन का काम कर सकता है. बावजूद इसके, अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के दावे और पड़ोस में बढ़ती सैन्य मौजूदगी भारत के लिए सतर्क रहने का संकेत हैं.
कुल मिलाकर, पेंटागन की यह रिपोर्ट बताती है कि आने वाले वर्षों में एशिया में सामरिक प्रतिस्पर्धा और तेज होगी, और भारत को कूटनीति के साथ-साथ रक्षा तैयारी भी मजबूत करनी होगी.
