Rajasthan News: कोटा की सभा में शिक्षा मंत्री का दावा, विपक्ष ने बताया वैज्ञानिक आधार से परे
Swaraj Times Desk: राजस्थान के शिक्षा मंत्री Madan Dilawar एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। 22 फरवरी को कोटा जिले के रामगंज मंडी क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि देसी गाय का दूध बच्चों को बुद्धिमान और सक्रिय बनाता है, जबकि भैंस का दूध उन्हें सुस्त और भ्रष्ट बनाता है।
गो-संवर्धन कार्यक्रम में दिया बयान
यह टिप्पणी ‘गो-संवर्धन और गोचारण’ विषय पर आयोजित सभा में की गई, जहां ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और स्थानीय अधिकारी मौजूद थे। मंत्री ने कहा कि ऊंची पीठ वाली देसी गाय का दूध पीने से व्यक्ति में तेज बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। वहीं, भैंस के दूध को उन्होंने सुस्ती से जोड़ते हुए विवादित टिप्पणी की।
‘ग्राम ग्वाला’ योजना का ऐलान
मंत्री दिलावर इस कार्यक्रम में ‘ग्राम ग्वाला’ योजना की घोषणा के लिए पहुंचे थे। इस योजना के तहत 70 से अधिक गायों पर एक ग्राम ग्वाला नियुक्त किया जाएगा। यदि संख्या ज्यादा होगी तो दो ग्वाले रखे जाएंगे। प्रत्येक ग्वाले को 10,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे और यह व्यवस्था गांव के दानदाताओं के सहयोग से चलेगी। इसका उद्देश्य परंपरागत गो-पालन को पुनर्जीवित करना बताया गया है।
दावे के समर्थन में दिया उदाहरण
अपने बयान को सही ठहराने के लिए मंत्री ने गाय और भैंस के बच्चों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यदि दोनों जानवरों को अलग-अलग दिशाओं में खड़ा कर उनके बच्चों को छोड़ा जाए, तो गाय का बछड़ा सीधे अपनी मां की ओर जाएगा, जबकि भैंस का पाड़ा भ्रमित हो जाएगा। उन्होंने इसे अपने दावे का प्रमाण बताया।
राजनीतिक और वैज्ञानिक बहस
मंत्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों और कई विशेषज्ञों ने इसे वैज्ञानिक आधार से परे बताते हुए आलोचना की है। उनका कहना है कि दूध के पोषण मूल्य पर वैज्ञानिक शोध आधारित चर्चा होनी चाहिए, न कि भावनात्मक या सांस्कृतिक तर्कों पर।
हालांकि, मंत्री के समर्थक इसे भारतीय परंपरा और देसी नस्लों के संरक्षण से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल यह बयान प्रदेश की राजनीति में नई बहस का केंद्र बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
