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Russian Oil Imports: विदेश सचिव बोले – ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती कीमतें ही हैं भारत की प्राथमिकता

Swaraj Times Desk: रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर चल रही अटकलों के बीच भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत ऊर्जा खरीद का फैसला अपने राष्ट्रीय हितों और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर करता है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से यह दावा किया गया था कि भारत रूस से तेल आयात कम कर सकता है।

विदेश सचिव ने साफ किया कि भारत की रणनीति हमेशा से ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखने की रही है। उन्होंने कहा कि भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80–85 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में देश महंगे दामों को लेकर संवेदनशील रहेगा और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तेल खरीद का व्यावसायिक निर्णय मुख्य रूप से भारतीय तेल कंपनियां लेती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव, उपलब्धता और लॉजिस्टिक लागत जैसे कारकों को ध्यान में रखती हैं। सरकार की भूमिका व्यापक नीति ढांचा तय करने तक सीमित रहती है।

अमेरिकी राजनीति में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदने पर सहमत हो सकता है। हालांकि भारतीय पक्ष ने साफ किया कि ऊर्जा आयात किसी एक देश तक सीमित नहीं किया जाएगा।

भारत ने दोहराया कि उसका लक्ष्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखना भी है। एशिया और विकासशील देशों के लिए सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति बेहद जरूरी है। ऐसे में भारत का मानना है कि विविध स्रोतों से खरीद करने से सप्लाई जोखिम कम होता है और कीमतों पर दबाव घटता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने की भारत की रणनीति ने घरेलू ईंधन कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद की है। लेकिन साथ ही भारत पश्चिम एशिया, अमेरिका और अफ्रीका जैसे अन्य क्षेत्रों से भी ऊर्जा आयात जारी रखे हुए है। कुल मिलाकर संदेश साफ है — भारत की ऊर्जा नीति भू-राजनीतिक दबावों से ज्यादा आर्थिक तर्क और उपभोक्ता हितों से संचालित होगी।

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