नए साल के पहले दिन ही सियासी तड़का – समाजवादी पार्टी का सहभोज,
भाजपा पर करारा तंज और चुनावी माहौल का आगाज़!
Swaraj Time Desk: लखनऊ में नव वर्ष 2026 की सुबह समाजवादी रंगों में रंगी नजर आई। समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय में सोमवार को आयोजित बाटी-चोखा सहभोज ने नए साल के स्वागत के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर दी। इस कार्यक्रम में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, पार्टी पदाधिकारी, वरिष्ठ नेता और जिले-जिले से आए कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। माहौल केवल खाकर जाने का नहीं, बल्कि पार्टी की एकजुटता और आने वाले चुनावों की तैयारी का संदेश देने वाला था।
अखिलेश यादव का तंज – ब्राह्मण विधायकों के भोज पर चुभती टिप्पणी
बीते दिनों भाजपा के ब्राह्मण विधायकों के सहभोज को लेकर सियासत गर्म रही थी। ठीक उसी संदर्भ में अखिलेश यादव ने हंसी-ठिठोली में तंज कसा –
“हम सभी लोग मिल-जुलकर खाते हैं, अभी वो विधायक बैठे-बैठे खा रहे हैं… अगर सरकार के खिलाफ खड़े हो गए तो क्या होगा?”
उनकी यह टिप्पणी पार्टी कार्यकर्ताओं में ठहाके और तालियों के बीच साफ संदेश छोड़ गई – सपा चाहे राजनीति में विरोधी हो, लेकिन संगठन के भीतर जाति और वर्ग का भेद नहीं, सभी एक प्लेट में बराबर।
सहभोज – राजनीति का नया मंच
पार्टी के भीतर यह आयोजन कार्यकर्ताओं के लिए शुभकामनाओं का मंच था, जहां सभी ने एक-दूसरे का अभिवादन किया। लेकिन हर राजनीतिक सभा की तरह यह मिलन भी संदेशों से भरा रहा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह आयोजन भीतरी एकता मजबूत करने और जनता को यह दिखाने की रणनीति है कि सपा सामूहिकता की राजनीति करती है, न कि वर्ग आधारित सहभोज का आयोजन।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी – चुनावी संकेत
प्रदेश मुख्यालय में वरिष्ठ नेता, विधायकों, महिला विंग, युवा विंग और कई जिलाध्यक्षों की उपस्थिति यह स्पष्ट करती है कि नए साल के साथ सपा ने चुनावी मोड शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि अब जनवरी से पार्टी पूरे यूपी में बूथ स्तर पर जनसंपर्क और ‘मिलकर खाओ – मिलकर जाओ’ जैसे सभाओं के जरिए अभियान शुरू करेगी।
सियासी संदेश – BJP पर सीधा निशाना
सपा समर्थकों ने सोशल मीडिया पर भी लिहाज़ से लिखा – “सपा में रोटी सबकी एक, थाली सबकी एक। BJP में भोज भी जातिगत…”
यह साफ है कि बाटी-चोखा ने केवल पेट नहीं भरा, बल्कि सियासी ‘नरेटिव’ भी गढ़ा – सपा बराबरी की राजनीति करती है, भाजपा विभाजन की।
