Swaraj Times Desk: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जिस तरह से सख्त रुख अपनाया है, वह अब सिर्फ सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। आतंक को पनाह देने वाले पड़ोसी देश को सबक सिखाने के लिए भारत ने रणनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक तीनों मोर्चों पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में भारत ने सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद एक और अहम फैसला लेते हुए चिनाब नदी पर दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी है। यह फैसला पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके जवाब में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पीओके और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके साथ ही भारत ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया। यह वही संधि थी, जिसके तहत पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के जल पर प्रमुख अधिकार मिले हुए थे।
संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान की बेचैनी साफ नजर आने लगी। कभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पानी की दुहाई दी गई, तो कभी परमाणु धमकियों की भाषा बोली गई। बिलावल भुट्टो समेत कई पाकिस्तानी नेताओं ने बयानबाजी तेज कर दी, लेकिन भारत अपने फैसले पर अडिग रहा।
अब इसी पृष्ठभूमि में भारत के पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-दो जलविद्युत परियोजना को हरी झंडी दे दी है। यह मंजूरी इस महीने की शुरुआत में EAC की 45वीं बैठक में दी गई, जिससे करीब 3,200 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
यह परियोजना ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ मॉडल पर आधारित है। इसका मतलब यह है कि इसमें नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोके बिना बिजली उत्पादन किया जाएगा और किसी बड़े बांध का निर्माण नहीं होगा। इससे पर्यावरणीय नुकसान भी कम होगा और ऊर्जा उत्पादन भी बढ़ेगा। यही कारण है कि भारत अब सिंधु घाटी में ऐसी कई परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
बैठक के दौरान समिति ने यह भी दर्ज किया कि चिनाब बेसिन से जुड़ी परियोजनाएं पहले सिंधु जल संधि के तहत तय मानकों के अनुसार डिजाइन की गई थीं, लेकिन अब 23 अप्रैल 2025 से यह संधि प्रभावी रूप से निलंबित है। इसका मतलब साफ है कि भारत अब इन नदियों पर अपने अधिकारों का ज्यादा सक्रियता से इस्तेमाल कर सकता है।
दुलहस्ती चरण-दो परियोजना, मौजूदा 390 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-एक परियोजना का विस्तार है, जिसे 2007 में NHPC ने शुरू किया था। यह पावर स्टेशन पिछले कई वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इसके दूसरे चरण के शुरू होने से जम्मू-कश्मीर में बिजली उत्पादन बढ़ेगा और क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा भारत सावलकोट, रातले, बरसर, पाकल दुल, क्वार, किरू और कीर्थई जैसी कई अन्य परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है। साफ है कि भारत अब पानी को रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा रहा है, जिससे पड़ोसी देश की रही-सही हेकड़ी भी निकलती नजर आ रही है।
