Swaraj Times Desk: भारत की कार्रवाई गलत तो फिर पाक की स्ट्राइक सही कैसे? मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर को घेरा
पाकिस्तान की राजनीति और धार्मिक हलकों में उस वक्त हलचल मच गई, जब जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने खुले मंच से पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए। कराची के ल्यारी इलाके में आयोजित तहफ्फुज दीनिया मदारीस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों को लेकर दोहरे मापदंडों पर तीखा हमला बोला।
मौलाना फजलुर रहमान ने साफ शब्दों में कहा कि अगर पाकिस्तान अपने दुश्मनों के ठिकानों पर हमला कर उसे जायज ठहराता है, तो भारत द्वारा आतंक के ठिकानों पर की गई कार्रवाई को गलत कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने बहावलपुर और मुरीदके का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत का तर्क भी वही है, जो पाकिस्तान अपने अभियानों के लिए देता रहा है। ऐसे में विरोध करना केवल राजनीतिक पाखंड लगता है।
उन्होंने अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी पाकिस्तानी सेना की नीति पर गंभीर सवाल उठाए। मौलाना ने कहा कि जब पाकिस्तान काबुल पर बमबारी करता है, तो वह वैसा ही है जैसे कोई इस्लामाबाद पर हमला करे। उनका सवाल था कि आखिर तालिबान या अफगान जनता ऐसी कार्रवाइयों को कब तक बर्दाश्त करेगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान हमेशा एक “प्रो-पाकिस्तान” अफगान सरकार चाहता रहा है, लेकिन इतिहास गवाह है कि जाहिर शाह से लेकर अशरफ गनी तक, अफगान सरकारें भारत के ज्यादा करीब रही हैं।
मौलाना फजलुर रहमान ने इसे पाकिस्तान की 78 साल पुरानी अफगान नीति की नाकामी करार दिया। उन्होंने कहा कि हर बार असफलता का दोष दूसरों पर मढ़ दिया जाता है, लेकिन आत्ममंथन कभी नहीं किया जाता। सवाल यह होना चाहिए कि क्या पाकिस्तान की अपनी नीतियां ही गलत दिशा में नहीं रहीं?
भारत के संदर्भ में उन्होंने मई में हुए सैन्य तनाव की ओर इशारा किया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर भारत आतंक के खिलाफ कार्रवाई करता है, तो उसे केवल भावनाओं के आधार पर गलत ठहराना तर्कसंगत नहीं है।
कुल मिलाकर, मौलाना फजलुर रहमान का बयान पाकिस्तान की सियासत और सेना के लिए असहज करने वाला है। यह बयान न सिर्फ भारत-पाक रिश्तों पर बहस को नया मोड़ देता है, बल्कि पाकिस्तान की आंतरिक नीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
