डिजिटल एक्स-रे से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तक, जानिए कैसे मजबूत हो रहा है यूपी का स्वास्थ्य सिस्टम
Swaraj Times Desk: उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर तेजी से बदल रही है. राज्य सरकार अब इलाज को सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय हर जिले तक आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के मिशन पर काम कर रही है. Yogi Adityanath सरकार ने जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने के लिए डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी है, जिससे आम लोगों को बेहतर इलाज अपने ही जिले में मिल सके.
राज्य के अनुपूरक बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए लगभग ₹3,500 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है. इस राशि का बड़ा हिस्सा जिला अस्पतालों में आधुनिक मशीनों, आईसीयू, लैब और डिजिटल सुविधाओं को मजबूत करने में खर्च किया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि गंभीर बीमारियों के लिए मरीजों को अब महानगरों या महंगे निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े.
डिजिटल सुविधाओं से लैस हो रहे जिला अस्पताल
प्रदेश के करीब 14 प्रमुख जिला अस्पतालों के आधुनिकीकरण के लिए ₹9.80 करोड़ की विशेष राशि जारी की गई है. इसके तहत डिजिटल एक्स-रे मशीन, अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड सिस्टम, पेशेंट मॉनिटर और ऑक्सीजन सपोर्ट जैसी सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं. लखनऊ के सिविल और बलरामपुर अस्पताल में बेड क्षमता बढ़ाई जा रही है, वहीं जनवरी 2026 के अंत तक नए आईसीयू वार्ड शुरू होने की संभावना है.
वाराणसी और इटावा को मिली बड़ी सौगात
स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव वाराणसी और इटावा में देखने को मिलेगा. वाराणसी के शिवप्रसाद गुप्ता (SSPG) मंडलीय चिकित्सालय को 500 बेड के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में बदला जा रहा है. इस परियोजना पर करीब ₹315 करोड़ खर्च होंगे, जिसमें 60% केंद्र और 40% राज्य सरकार वहन करेगी.
इसी तरह, इटावा के सैफई में 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल 2026 में पूरी तरह संचालित होगा, जिससे आसपास के करीब 10 जिलों के मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा.
महत्वपूर्ण आंकड़े जो बताते हैं बदलाव की रफ्तार
- बजट 2025-26: स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ₹50,550 करोड़ से अधिक का प्रस्ताव
- बेड क्षमता विस्तार: अमेठी, वाराणसी सहित कई जिलों में 350–500 नए बेड
- लैब नेटवर्क: 27 जिलों में एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं (IPHL)
- लक्ष्य 2027: जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में बदलकर डॉक्टरों की कमी दूर करना
सरकार का विजन ‘विकसित यूपी–2047’ के तहत हर जिले में मजबूत स्वास्थ्य ढांचा खड़ा करना है. इन प्रयासों से न केवल इलाज सस्ता और सुलभ होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों से इलाज के लिए होने वाला पलायन भी कम होगा.
