महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में धांधली का दावा, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठे सवाल
Swaraj Times Desk: महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों को लेकर राज्य की राजनीति में घमासान तेज हो गया है. इसी बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ दल पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव “खुलेआम चोरी” किए जा रहे हैं और चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है.
प्रियंका चतुर्वेदी ने बेहद सख्त लहजे में कहा, “महाराष्ट्र में चुनाव चोरी हो रहा है. राज्य चुनाव आयोग अंधा बन चुका है. नगर निगम चुनावों में खुलेआम धांधली हो रही है. अगर यही हाल है तो चुनाव आयोग को बंद कर देना चाहिए और अब उसे BJP ऑफिस से काम करना चाहिए.” उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में हलचल मच गई है.
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
प्रियंका चतुर्वेदी के आरोप सीधे तौर पर Election Commission of India की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं. उनका कहना है कि जिस तरह से सत्ता पक्ष के नेताओं द्वारा दबाव और धमकियों की राजनीति की जा रही है, उस पर चुनाव आयोग की चुप्पी बेहद चिंताजनक है. उन्होंने दावा किया कि लोकतंत्र की बुनियादी संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है.
स्पीकर राहुल नार्वेकर पर भी आरोप
शिवसेना यूबीटी नेता ने महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर का नाम लेते हुए कहा कि वे निकाय चुनावों के दौरान खुलेआम धमकी भरे बयान दे रहे हैं. प्रियंका के मुताबिक, जब संवैधानिक पदों पर बैठे लोग इस तरह का आचरण करेंगे, तो निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कैसे की जा सकती है.
इंदौर दूषित पानी मामले पर भी साधा निशाना
निकाय चुनाव के अलावा प्रियंका चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले को लेकर भी राज्य सरकार पर हमला बोला. उन्होंने इसे “देश को शर्मसार करने वाली घटना” बताया और कहा कि इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले मध्य प्रदेश में कफ सिरप से हुई मौतों के मामले को दबाने की कोशिश की गई थी.
सियासी माहौल और गरमाने के आसार
प्रियंका चतुर्वेदी के इन बयानों के बाद महाराष्ट्र निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल और गरमा गया है. विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित करार दे सकता है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनावी बहस के केंद्र में रहने की पूरी संभावना है.
