कूटनीतिक जंग तेज — प्रतिबंध, पलटवार और बढ़ती वैश्विक तनातनी
Swaraj Times Desk: मध्य पूर्व और यूरोप के बीच तनाव एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। European Union ने ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को अपनी आतंकी सूची में शामिल करने का बड़ा फैसला लिया है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख Kaja Kallas ने इसे “निर्णायक कदम” बताते हुए कहा कि जो शासन अपने ही नागरिकों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई में शामिल हो, उसे आतंकवादी गतिविधियों से अलग नहीं देखा जा सकता।
यह लिस्टिंग सभी 27 यूरोपीय सदस्य देशों पर लागू होगी। विश्लेषकों के मुताबिक, भले ही यह कदम प्रतीकात्मक दिखे, लेकिन इसका असर कूटनीतिक रिश्तों, आर्थिक प्रतिबंधों और सुरक्षा सहयोग पर पड़ सकता है। IRGC पहले से ही अमेरिका की आतंकवादी सूची में है, लेकिन यूरोप का यह कदम तनाव को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
तेहरान की तीखी प्रतिक्रिया
EU के फैसले के तुरंत बाद तेहरान से सख्त बयान सामने आया। ईरान की सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े वरिष्ठ नेता Ali Larijani ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि अगर यूरोपीय देश IRGC के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करते हैं, तो उनकी सेनाओं को भी “आतंकवादी” घोषित किया जा सकता है। यह बयान ईरान की संसद में लाए गए प्रस्ताव के हवाले से दिया गया, जिसमें “पारस्परिक कदम” उठाने की बात कही गई है।
ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के करीबी हलकों से भी संकेत मिले हैं कि यूरोप के साथ रिश्तों की समीक्षा की जा सकती है। इससे परमाणु वार्ता, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
विवाद की जड़ क्या है?
EU का यह कदम ईरान में पिछले वर्षों में हुए सरकार-विरोधी प्रदर्शनों और कथित दमनात्मक कार्रवाई के संदर्भ में उठाया गया है। मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए या गिरफ्तार हुए। यूरोप का मानना है कि IRGC इन कार्रवाइयों में केंद्रीय भूमिका निभाता रहा है।
आगे क्या?
अब हालात “प्रतिबंध बनाम प्रतिशोध” की स्थिति में पहुँच गए हैं। यदि दोनों पक्ष कूटनीतिक संवाद की बजाय टकराव की राह चुनते हैं, तो इसका असर न सिर्फ ईरान-EU संबंधों पर बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार, सुरक्षा समीकरण और मध्य पूर्व की स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
