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Swaraj Times Desk: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म करने का फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कैबिनेट से चर्चा किए बिना लिया। उन्होंने इस निर्णय को नोटबंदी जैसा विनाशकारी करार दिया और कहा कि यह फैसला देश के संघीय ढांचे और गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला है।

दरअसल, संसद ने 18 दिसंबर को विकसित भारत जी राम जी विधेयक 2025 को मंजूरी दी थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के बाद यह विधेयक कानून बन चुका है और अब यह 20 साल पुराने मनरेगा की जगह लेगा। इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली में कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।

CWC बैठक में उठा मनरेगा का मुद्दा

कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, महासचिव केसी वेणुगोपाल, सांसद शशि थरूर, जयराम रमेश, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

बैठक के बाद राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं थी, बल्कि यह अधिकार आधारित सोच का प्रतीक थी। उनके मुताबिक, इस योजना को समाप्त करना उस सोच पर सीधा हमला है, जिसने ग्रामीण गरीबों को रोजगार का कानूनी अधिकार दिया था।

“कैबिनेट से पूछे बिना लिया गया फैसला”

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मनरेगा को खत्म करने से पहले न तो कैबिनेट से चर्चा की गई और न ही ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से राय ली गई। उन्होंने कहा कि यह फैसला सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से लिया गया है। राहुल गांधी ने तीखे शब्दों में कहा, “देश में वन मैन शो चल रहा है। जो प्रधानमंत्री चाहते हैं, वही होता है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम सत्ता और वित्तीय संसाधनों के केंद्रीकरण की ओर इशारा करता है, जिससे राज्यों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं।

खरगे का हमला: ग्रामीण भारत पर चोट

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल दी थी। यह दुनिया का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम बना, जिससे पलायन रुका और गांवों में गरीबों को सम्मान के साथ काम मिला।

खरगे ने कहा कि इस योजना ने दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और भूमिहीन मजदूरों को यह भरोसा दिया कि संकट के समय सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने याद दिलाया कि जैसे कांग्रेस किसानों के मुद्दे पर डटी रही और अंततः सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े, वैसे ही मनरेगा के मुद्दे पर भी कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी।

जन-आंदोलन की तैयारी

खरगे ने कहा कि राहुल गांधी पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि मोदी सरकार को भविष्य में मनरेगा दोबारा बहाल करना पड़ेगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि इस मुद्दे पर ठोस रणनीति बनाकर देशव्यापी जन-आंदोलन खड़ा किया जाए।

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि मौजूदा हालात में देश के कमजोर और गरीब वर्ग की उम्मीदें कांग्रेस से जुड़ी हैं, और पार्टी इस लड़ाई को पूरी मजबूती से लड़ेगी।

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