Assam CM Shooting Video Controversy: नफरती भाषण के आरोपों पर शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप की मांग, सियासत गरम
Swaraj Times Desk: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़ा कथित “शूटिंग वीडियो” विवाद अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुँच गया है। उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा कथित रूप से भड़काऊ और गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए जाने के आरोपों को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इस मामले में दिशा-निर्देश और जवाबदेही तय करने की मांग की है।
याचिका में दावा किया गया है कि कुछ बयानों और सोशल मीडिया सामग्री के ज़रिये अल्पसंख्यक समुदायों को लेकर आपत्तिजनक संदेश प्रसारित हुए, जो संवैधानिक पदों की गरिमा के विपरीत हैं। इस याचिका पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता जॉन दयाल समेत कुल 12 लोग शामिल बताए गए हैं। उनका कहना है कि अदालत को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाएँ।
इस बीच हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी सरमा के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि नफरती भाषणों को सामान्य बना दिया गया है और कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ओवैसी ने स्थानीय पुलिस प्रशासन से इस मामले में कानूनी कदम उठाने की अपील की है।
विवाद तब और बढ़ा जब विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया था, जिसे बाद में हटा लिया गया। हालांकि इस वीडियो की प्रामाणिकता और संदर्भ को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, और आधिकारिक जांच या न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
राजनीतिक रूप से यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह अभिव्यक्ति की सीमा, नफरत फैलाने वाले भाषण और सार्वजनिक पदों की जवाबदेही जैसे बड़े संवैधानिक सवालों को छूता है। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई स्वीकार करता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
फिलहाल, यह विवाद अदालत और सियासत—दोनों जगह—गंभीर बहस का विषय बन चुका है।
