अफगानिस्तान मोर्चे पर बयान से घिरे ट्रंप, NATO देशों की नाराज़गी के बाद सोशल मीडिया पर दिखाया नरम रुख
Swaraj Times Desk: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर अपने बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय विवाद में घिर गए. अफगानिस्तान युद्ध को लेकर NATO सहयोगी देशों पर की गई टिप्पणी के बाद जब कूटनीतिक दबाव बढ़ा और सहयोगी देशों ने माफी की मांग की, तो ट्रंप ने यू-टर्न लेते हुए अपने पुराने सहयोगियों की जमकर तारीफ की और अंत में लिखा – “Love You All!”
दरअसल, इस सप्ताह की शुरुआत में फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि 9/11 के बाद अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के दौरान ब्रिटेन और अन्य NATO देशों के सैनिक अग्रिम मोर्चे से “थोड़ा पीछे” रहे. ट्रंप के इस बयान को NATO सहयोगियों ने अपने सैनिकों के बलिदान का अपमान बताया.
ब्रिटेन और डेनमार्क की कड़ी प्रतिक्रिया
ट्रंप की टिप्पणी के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने इसे “भयानक और अपमानजनक” करार दिया. वहीं डेनमार्क की प्रधानमंत्री Mette Frederiksen ने भी बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि NATO सैनिकों ने अफगानिस्तान में भारी बलिदान दिए हैं और इस तरह की टिप्पणी गठबंधन की भावना को ठेस पहुंचाती है. कई NATO नेताओं ने ट्रंप से सार्वजनिक माफी की मांग कर दी.
बढ़ते विवाद के बाद ट्रंप का बदला रुख
कूटनीतिक दबाव बढ़ने और आलोचना तेज होने के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक नया पोस्ट साझा किया. इसमें उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों की भूमिका की खुलकर सराहना की. ट्रंप ने लिखा,
“यूनाइटेड किंगडम के महान और बेहद बहादुर सैनिक हमेशा अमेरिका के साथ खड़े रहे हैं. अफगानिस्तान में 457 ब्रिटिश सैनिक शहीद हुए, कई गंभीर रूप से घायल हुए. वे अब तक के सबसे महान योद्धाओं में शामिल थे.”
ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन का रिश्ता बेहद मजबूत है और इसे कभी तोड़ा नहीं जा सकता. पोस्ट के अंत में उन्होंने भावनात्मक अंदाज में लिखा, “हम आप सभी से प्यार करते हैं और हमेशा करते रहेंगे!”
कूटनीतिक नुकसान की भरपाई की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह नरम रुख NATO सहयोगियों को साधने की कोशिश है. अफगानिस्तान युद्ध में ब्रिटेन समेत कई देशों ने बड़ी संख्या में सैनिक खोए थे और ऐसे में उनके योगदान पर सवाल उठना स्वाभाविक रूप से नाराज़गी पैदा करता है. ट्रंप का यह यू-टर्न दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर दबाव पड़ने पर उन्हें अपने बयानों को संतुलित करना पड़ा.
