RJD में नेतृत्व बदलाव या परिवारवाद? तेजस्वी यादव की ताजपोशी पर NDA का बड़ा सवाल
Swaraj Times Desk: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में संगठनात्मक फेरबदल के बाद सियासी पारा चढ़ गया है. तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के ऐलान पर एनडीए नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिम्मेदारी सौंपने से पहले यह तय होना चाहिए था कि आरजेडी की ऐतिहासिक हार की असली वजह क्या रही.
रविवार (25 जनवरी, 2026) को हुई पार्टी बैठक में तेजस्वी यादव की नई भूमिका पर मुहर लगी. इसके बाद चिराग पासवान ने कहा, “यह अच्छी बात है, यह आज नहीं तो कल होना ही था. लेकिन सवाल यह है कि हार के कारणों की जिम्मेदारी किसकी है? अगर प्रदर्शन बेहतर होता, तो कमान सौंपना स्वाभाविक होता.”
‘प्रदर्शन बेहतर होता तो जिम्मेदारी स्वाभाविक’
चिराग पासवान ने कहा कि तेजस्वी यादव लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं, इसलिए नेतृत्व उन्हीं के हाथों में जाना तय था, लेकिन यह कमान तब दी जाती जब पार्टी उनके नेतृत्व में बेहतर प्रदर्शन करती. “हार के बाद जिम्मेदारी से भागना और फिर बड़े पद से नवाज़ा जाना—यह समझ से परे है,” उन्होंने जोड़ा.
परिवारवाद का आरोप
तेजस्वी पर निशाना साधते हुए चिराग पासवान ने कहा कि हार के बाद मीडिया का सामना नहीं किया गया, कार्यकर्ताओं से संवाद नहीं हुआ, और अब अचानक बड़ा पद दे दिया गया. उन्होंने तंज कसा कि जब प्रदेश अध्यक्ष स्तर पर जवाबदेही तय की जा रही है, तब शीर्ष नेतृत्व को प्रमोट करना बताता है कि पार्टी परिवार तक सीमित होती जा रही है.
‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का दावा
एक सवाल के जवाब में चिराग पासवान ने 90 के दशक की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में पलायन बढ़ा और बिहारियों को बाहर जाना पड़ा. उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में हालात पर नियंत्रण की कोशिश हो रही है और ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ के लक्ष्य के साथ वे आगे बढ़ रहे हैं. “आने वाले दिनों में विकसित बिहार का रोडमैप यही होगा,” उन्होंने कहा.
सियासत का अगला अध्याय
तेजस्वी यादव की ताजपोशी को RJD संगठन के लिए नई शुरुआत बताया जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे जवाबदेही से बचने का कदम कह रहा है. अब निगाहें इस पर हैं कि तेजस्वी अपनी नई भूमिका में पार्टी को किस दिशा में ले जाते हैं और इन आरोपों का राजनीतिक जवाब कैसे देते हैं.
