• Mon. Mar 9th, 2026

Maharashtra News: टीपू सुल्तान की तस्वीर से शुरू हुआ विवाद, अब BJP-कांग्रेस आमने-सामने

Swaraj Times Desk: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर इतिहास की गूंज सुनाई दे रही है। शिवसेना (UBT) के मुखपत्र सामना के ताजा संपादकीय ने Tipu Sultan को लेकर छिड़े विवाद पर बीजेपी और कांग्रेस—दोनों को निशाने पर लिया है। मामला मालेगांव महानगरपालिका के डिप्टी मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने से शुरू हुआ, जिसे बाद में हटा दिया गया। लेकिन तस्वीर हटने के बावजूद राजनीतिक तापमान कम नहीं हुआ।

संपादकीय में लिखा गया कि जैसे Aurangzeb और Afzal Khan को बार-बार विवादों में खींचा जाता है, वैसे ही अब टीपू सुल्तान को “कब्र से बाहर” लाया जा रहा है। सामना ने आरोप लगाया कि बीजेपी इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम रंग देने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस भी निशाने पर

विवाद तब और गहरा गया जब महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष Harshvardhan Sapkal ने टीपू सुल्तान की तुलना Chhatrapati Shivaji Maharaj से कर दी। संपादकीय में इस तुलना को “असंगत” और “अनुचित” बताया गया। लेख में कहा गया कि शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज की स्थापना शून्य से की, जबकि टीपू को राज्य विरासत में मिला था—इसलिए दोनों की तुलना इतिहास के साथ अन्याय है।

बीजेपी पर दोहरा मापदंड?

सामना ने मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis और बीजेपी की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। लेख में पूछा गया कि अगर टीपू को लेकर इतना आक्रोश है, तो फिर पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच पर चुप्पी क्यों? संपादकीय में गृह मंत्री Amit Shah के बेटे Jay Shah का उल्लेख करते हुए तंज कसा गया कि भारत-पाक मैच पर कोई विरोध क्यों नहीं दिखता।

लेख में यह भी कहा गया कि टीपू सुल्तान को पाकिस्तान में ‘नायक’ माना जाता है, फिर भी भारत-पाक क्रिकेट जारी है। ऐसे में राजनीतिक विरोध चयनात्मक क्यों दिखता है?

इतिहास बनाम वर्तमान राजनीति

संपादकीय में टीपू सुल्तान के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा गया कि वह अंग्रेजों के खिलाफ लड़े, लेकिन उन पर हिंदुओं के जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप भी लगते रहे हैं। यही वजह है कि उनका नाम आते ही विवाद खड़ा हो जाता है।

अंत में सामना ने बीजेपी से सवाल किया कि इतिहास के मुद्दों को उछालने के बजाय वर्तमान में जनता के लिए क्या किया जा रहा है, इस पर जवाब दिया जाए। टीपू सुल्तान का नाम फिर चर्चा में है—लेकिन सवाल यह है कि यह बहस इतिहास को समझने के लिए है या वर्तमान राजनीति को गर्म रखने के लिए?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *