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दिल्ली हाईकोर्ट के सामने सरकार का बड़ा ऐलान, लाखों परिवारों को सीधा फायदा

Swaraj Times Desk: दिल्ली के लोगों के लिए इलाज को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है. दिल्ली सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए मुफ्त इलाज की सालाना आय सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है. इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया है. इसका सीधा मतलब है कि अब पहले से कहीं ज्यादा परिवार सरकारी अस्पतालों और रियायती जमीन पर बने निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज का लाभ उठा सकेंगे.

क्या बदला इस फैसले से?

अब तक EWS श्रेणी के तहत मुफ्त इलाज के लिए सालाना आय सीमा 2.25 लाख रुपये थी. नई व्यवस्था के तहत यह सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है. यानी जिन परिवारों की सालाना आय 5 लाख रुपये तक है, वे भी अब इस योजना के दायरे में आ गए हैं. इससे दिल्ली के मध्यम और निम्न आय वर्ग के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है.

हाईकोर्ट की बेंच ने क्या कहा?

इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच कर रही थी. कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि सरकार इस फैसले का बड़े पैमाने पर प्रचार करे, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति जानकारी के अभाव में इलाज से वंचित न रह जाए.

यह मामला 2017 में डॉक्टरों पर हो रही हिंसा को लेकर स्वतः संज्ञान (suo motu) से शुरू की गई जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें अस्पतालों की सुविधाओं और व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे थे.

अस्पतालों की सुविधाओं पर भी सख्ती

हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया है कि सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध जांच सुविधाओं—जैसे एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई—की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए. इसके साथ यह भी बताया जाए कि कौन-सी मशीन चालू है और कौन-सी खराब. साथ ही 2025 में इन जांचों से कितने मरीजों को लाभ मिला, इसकी जानकारी भी साझा करने को कहा गया है.

स्टाफ और टेक्नोलॉजी पर जोर

कोर्ट ने डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की समय पर भर्ती पर जोर दिया है. साथ ही सुझाव दिया है कि इन सभी जानकारियों को मोबाइल ऐप पर रियल-टाइम में उपलब्ध कराने पर सरकार और एनआईसी विचार करें, ताकि मरीजों और एंबुलेंस सेवाओं को तुरंत सही जानकारी मिल सके.

लोक नायक अस्पताल परियोजना पर अब तक 550 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं. कोर्ट ने इसे जल्द पूरा कर मरीजों के लिए शुरू करने के निर्देश दिए हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी.

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