UP Politics: समाजवादी पार्टी के सांसद ने लोकसभा में UGC विधेयक 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो सकता है।
Swaraj Times Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) विधेयक 2026 को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो सकती है। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद शिवपाल सिंह पटेल के लोकसभा में दिए गए बयान के बाद इस मुद्दे ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। उनके आरोपों के बाद भाजपा के लिए भी इस मामले में जवाब देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
लोकसभा में अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच पर चर्चा के दौरान सपा सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने यूजीसी विधेयक 2026 केवल वोट हासिल करने के उद्देश्य से पेश किया था और अब इसे ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी की जा रही है।
प्रतापगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने कहा कि सरकार इस विधेयक का न्यायालय में सही तरीके से बचाव भी नहीं कर पा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के वकील अदालत में विधेयक के समर्थन में प्रभावी तर्क नहीं दे पा रहे हैं।
सपा सांसद ने यह भी दावा किया कि देश के विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव की समस्या बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का माहौल चिंताजनक होता जा रहा है और वहां खुलेआम जातिवाद देखने को मिल रहा है।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि आज के समय में “द्रोणाचार्य” छात्रों से अंगूठा नहीं मांगते, बल्कि वाइवा के दौरान नंबर काटकर या फाइल में ‘उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिला’ लिखकर उन्हें अवसर से वंचित कर देते हैं।
उन्होंने भारतीय प्रबंध संस्थानों (IIM) में भी प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए। उनके मुताबिक अहमदाबाद, कोलकाता, इंदौर और शिलांग जैसे प्रमुख आईआईएम संस्थानों में ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षकों का प्रतिनिधित्व शून्य प्रतिशत है, जबकि सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व पूरी तरह है।
शिवपाल सिंह पटेल ने प्रधानमंत्री के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने खुद को पिछड़ी जाति से आने वाला बताया था। सपा सांसद ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद सरकार पिछड़े वर्गों के साथ भेदभाव कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के बाद यूपी में यूजीसी विधेयक को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो सकती है।
