महोबा की सड़क से उठी सियासी धूल, सत्ता के भीतर ही टकराव की खुली तस्वीर
Swaraj Times Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब महोबा में सत्तारूढ़ बीजेपी के ही एक विधायक ने अपनी सरकार के मंत्री का काफिला बीच सड़क पर रुकवा दिया। यह नज़ारा सिर्फ प्रशासनिक अव्यवस्था का नहीं, बल्कि सत्ता के अंदर simmer कर रहे असंतोष का संकेत माना जा रहा है। घटना के बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला।
क्या हुआ महोबा में?
जानकारी के मुताबिक, चरखारी से बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत ने करीब 50 ग्राम प्रधानों और सैकड़ों समर्थकों के साथ हाईवे पर डेरा डाल दिया। उसी दौरान यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला वहां से गुजर रहा था। विधायक ने समर्थकों के साथ गाड़ियां आगे खड़ी कर काफिला रोक दिया। अचानक बने इस हालात से पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
विधायक की नाराजगी का कारण था जल जीवन मिशन के तहत बिछाई गई पाइपलाइन के बाद खराब पड़ी ग्रामीण सड़कें। उनका आरोप है कि करीब 100 गांवों में सड़कें खोद दी गईं, लेकिन महीनों से मरम्मत नहीं हुई। ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद अफसर कार्रवाई नहीं कर रहे, जिससे जनता में भारी गुस्सा है।
मंत्री को उतरना पड़ा गाड़ी से
मामला बढ़ता देख मंत्री स्वतंत्र देव सिंह खुद गाड़ी से उतरकर विधायक से बात करने पहुंचे। बाद में वे नाराज विधायक को साथ लेकर कलेक्ट्रेट गए, जहां अधिकारियों के साथ बंद कमरे में आपात बैठक हुई। बैठक में 20 दिनों के भीतर सड़कों की मरम्मत कराने का आश्वासन दिया गया।
अखिलेश यादव का तंज
इस घटना पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बीजेपी का “डबल इंजन” ही नहीं, उसके “डिब्बे भी आपस में टकरा रहे हैं।” उनका कहना था कि मंत्री और विधायक जनता की समस्याओं के बजाय आपसी खींचतान में लगे हैं, जो सरकार की विफलता का संकेत है।
सियासी मायने
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह घटना बताती है कि ज़मीनी स्तर पर जनप्रतिनिधियों की नाराजगी बढ़ रही है। चुनावी साल के करीब आते ही ऐसे टकराव पार्टी के भीतर दबाव की राजनीति को उजागर कर रहे हैं।
