भारतीय हमले के डर से बंकर में छिपे थे जरदारी,
फिर भी मंच पर आकर भारत और हिंदुओं पर कट्टरपंथी जहर उगला
Swaraj Times Desk: भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं को धराशायी करके रख दिया, बल्कि इसने वहां की सत्ता के भीतर की घबराहट और कमजोरी का भी पर्दाफाश कर दिया है। अब पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के एक बयान ने इस डर की वास्तविकता को फिर से उजागर कर दिया है। सोमवार की एक सभा में बोलते हुए जरदारी ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर के समय उन्हें सुरक्षा एजेंसियों ने बंकर में छिपने की सलाह दी थी। इसके बावजूद उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर की भाषा अपनाते हुए कहा— “हम मुसलमान हैं, हमें अपनी रक्षा करना आता है।”
यह बयान उस समय सामने आया जब कुछ ही महीने पहले पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने दुनिया के सामने हिंदू–मुस्लिम के अंतर को उकसाते हुए कट्टरपंथी भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान और भारत का मूलभूत अंतर यही है—“हम दो राष्ट्र हैं, एक नहीं।” उनके इस भाषण के कुछ ही दिनों बाद 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमला हुआ था – जिसने इन बयानों और घटनाओं के बीच के संबंध पर गंभीर सवाल खड़े किए।
भारत का ऑपरेशन सिंदूर — जिसने PAK को हिला दिया
भारत ने 7 मई 2025 को आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान एवं PoK में आतंकियों के ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया।
- इंडियन एयरफोर्स ने आतंकी शिविर, लॉन्च पैड और सपोर्ट यूनिट्स को निशाना बनाया
- पाकिस्तानी सेना की मदद करने वाले कई ठिकाने भी तबाह हुए
- भारतीय वायुसेना ने PAF के कई एयरबेस भी नष्ट किए, जिससे पाकिस्तानी सैन्य ढांचे की नींव हिल गई
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में स्वीकार किया कि “10 मई की सुबह भारत ने नूर खान एयरबेस पर हमला किया और 36 घंटों में 80 ड्रोन पाक क्षेत्र में दागे।”
यानि पाकिस्तान की कहानी और प्रचार के उलट – असली घटनाक्रम भारत की क्षमता और PAK की अक्षमता साबित करता है।
PAK में कट्टर इस्लामी राष्ट्र बनने की नई रणनीति?
जरदारी के बयान ने एक नई बहस छेड़ दी है – क्या पाकिस्तान खुद को एक कट्टर इस्लामी पहचान में ढालने की कोशिश कर रहा है?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा –
“हम मुसलमान हैं और हमें अपनी रक्षा करना आती है।”
“अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब पाकिस्तान को सुन रहा है, यहां तक कि डोनाल्ड ट्रंप ने भी जनरल आसिम मुनीर की प्रशंसा की।”
यानी जरदारी भी उसी धार्मिक पहचान–आधारित राष्ट्रवाद को आगे बढ़ा रहे हैं, जिस पर पिछले महीनों से आसिम मुनीर चुनावी और सैन्य एजेंडा चलाते दिख रहे हैं।
उन्होंने यह दावा भी किया कि—
“मुनीर को फील्ड मार्शल बनाने में पीपीपी (उनकी पार्टी) का हाथ था।”
इस बयान ने पाक का एक और सच सामने रखा — सैन्य पदों के पीछे भी वहां राजनीतिक सौदेबाजी और अंदरूनी गठजोड़ सक्रिय हैं, न कि योग्यता।
भारत का नाम लेकर PAK की राजनीति जीवित!
विशेषज्ञों का कहना है —
“भारत के नाम पर डर, धर्म और दुश्मनी खड़ा करना—यही आज पाकिस्तान की राजनीति की ऑक्सीजन बन चुका है।”
जरदारी का बयान भी उसी हताशा और असुरक्षा का प्रतीक लगता है, जो ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के सत्ता ढांचे में बनाए गए घावों से रिसता दिख रहा है।
