भारत-EU की ऐतिहासिक साझेदारी से बदलेगा ग्लोबल पावर बैलेंस, ट्रेड डील बनी ‘उम्मीद की किरण’
Swaraj Times Desk: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में रिपब्लिक डे 2026 के मौके पर एक नया ऐतिहासिक मोड़ आता दिख रहा है. भारत दौरे पर पहुंचीं Ursula von der Leyen ने ऐसा बयान दिया है, जिसे सीधे तौर पर पूरी दुनिया, खासकर अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ राजनीति के जवाब के रूप में देखा जा रहा है.
EU प्रमुख ने साफ कहा कि भारत और यूरोप ने विभाजन और टकराव के दौर में “रणनीतिक साझेदारी, संवाद और खुलेपन” का रास्ता चुना है, और यही संदेश अब पूरी दुनिया को दिया जा रहा है.
‘विभाजित दुनिया को दिखा रहे हैं नया विकल्प’
प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ होने वाली शिखर वार्ता से पहले वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा,
“भारत और यूरोप ने एक स्पष्ट विकल्प चुना है – रणनीतिक साझेदारी, संवाद और खुलेपन का. हम अपनी ताकतों का उपयोग कर रहे हैं और आपसी समझ बना रहे हैं. हम एक विभाजित दुनिया को दिखा रहे हैं कि सहयोग का यह रास्ता भी संभव है.”
राजनयिक हलकों में इसे अमेरिका की आक्रामक टैरिफ नीति और ‘ब्लॉक पॉलिटिक्स’ के बरक्स एक संतुलित वैश्विक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है.
गणतंत्र दिवस पर EU नेतृत्व की मौजूदगी का संदेश
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में European Union की शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी अपने-आप में एक मजबूत संकेत है. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष Antonio Costa भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए.
EU की ओर से जारी बयान में कोस्टा ने कहा कि भारत और यूरोप मिलकर नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने की साझा जिम्मेदारी निभा रहे हैं.
जयशंकर बोले – नया अध्याय शुरू होगा
इससे पहले विदेश मंत्री S. Jaishankar ने EU के दोनों शीर्ष नेताओं से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि यह भारत-EU शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय खोलने जा रहा है. जयशंकर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली चर्चा रणनीतिक, आर्थिक और वैश्विक सहयोग को नई दिशा देगी.
‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ की दहलीज पर भारत-EU
दावोस में पहले ही वॉन डेर लेयेन इस प्रस्तावित व्यापार समझौते को “सभी समझौतों की जननी” बता चुकी हैं. यह डील करीब दो अरब लोगों के बाजार को जोड़ने वाली है और वैश्विक GDP के लगभग एक-चौथाई हिस्से को कवर करेगी.
वर्तमान में भारत और EU के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 136 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो इस साझेदारी की ताकत को दर्शाता है.
क्यों अहम है यह बयान?
ट्रंप की टैरिफ धमकियों, अमेरिका-EU तनाव और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच EU चीफ का यह बयान साफ संकेत देता है कि भारत और यूरोप मिलकर एक वैकल्पिक, सहयोग-आधारित वैश्विक व्यवस्था का खाका खींच रहे हैं.
