• Wed. Mar 11th, 2026

Swaraj Times Desk: 25 दिसंबर को देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी, बल्कि विपक्ष के कई नेता भी उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अटल जी की सबसे बड़ी खासियत यही थी कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद उनके संबंध राजनीतिक विरोधियों से भी सम्मानपूर्ण और आत्मीय बने रहते थे। ऐसा ही एक दिलचस्प और चर्चित किस्सा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़ा हुआ है।

आज भले ही बंगाल की राजनीति में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने हों, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब ममता बनर्जी एनडीए सरकार का हिस्सा थीं। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में ममता बनर्जी ने रेल मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। हालांकि, उस समय भी ममता अपनी तेज-तर्रार और जिद्दी राजनीति के लिए जानी जाती थीं और अक्सर सरकार के फैसलों पर सवाल खड़े करती रहती थीं।

विजय त्रिवेदी की पुस्तक ‘हार नहीं मानूंगा: एक अटल जीवन गाथा’ में इस रिश्ते से जुड़ा एक रोचक प्रसंग बताया गया है। बात उस समय की है जब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर ममता बनर्जी केंद्र सरकार से बेहद नाराज हो गई थीं। उनकी नाराजगी इतनी बढ़ गई कि उन्हें मनाने के लिए भेजे गए रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज से भी उन्होंने मुलाकात करने से इनकार कर दिया।

मामला जब ज्यादा बढ़ गया तो प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने खुद पहल करने का फैसला किया। एक दिन वे अचानक ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित घर पहुंच गए। संयोग से उस समय ममता घर पर मौजूद नहीं थीं, लेकिन उनकी मां से अटल जी की मुलाकात हुई। अटल बिहारी वाजपेयी ने पूरी विनम्रता के साथ ममता की मां के पैर छुए, उनका हालचाल जाना और फिर मुस्कुराते हुए मजाकिया अंदाज में कहा— “आपकी बेटी बहुत शरारती है, बहुत तंग करती है।”

अटल जी का यह सरल, मानवीय और अपनापन भरा व्यवहार इतना प्रभावशाली था कि ममता बनर्जी का गुस्सा कुछ ही समय में शांत हो गया। यह घटना अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक परिपक्वता और मानवीय संवेदनशीलता का बेहतरीन उदाहरण मानी जाती है।

हालांकि बाद में ममता बनर्जी ने अन्य राजनीतिक मतभेदों के चलते एनडीए से अलग होकर वर्ष 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना कर ली, लेकिन अटल जी के साथ उनका यह प्रसंग आज भी भारतीय राजनीति के सबसे यादगार किस्सों में गिना जाता है। यह घटना दिखाती है कि अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि संवाद और सौहार्द की मिसाल थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *