• Fri. Mar 13th, 2026

पीएन पाठक ने कहा – ब्राह्मण समाज मार्गदर्शक है, इसे राजनीतिक गोलबंदी से जोड़ना गलत

Swaraj Times Desk: उत्तर प्रदेश में सर्दी के मौसम के साथ सियासत का तापमान भी गर्म है। यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बीच, बीते 23 दिसंबर की शाम कुशीनगर से बीजेपी विधायक पंचानंद पाठक (पीएन पाठक) के सरकारी आवास पर ब्राह्मण समाज के विधायक और विधान परिषद सदस्यों का एक बड़ा सहभोज आयोजन हुआ। इस राजनीतिक डिनर में बीजेपी से जुड़े लगभग 40–50 ब्राह्मण विधायकों की मौजूदगी ने पूरे प्रदेश में नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी थी।

कार्यक्रम में पूर्वांचल और बुंदेलखंड के कई प्रभावशाली चेहरे मौजूद थे। हालांकि, सोशल मीडिया पर इसे लेकर चल रही सियासी अटकलों के बीच अब खुद विधायक पीएन पाठक ने अपना पक्ष सामने रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस कार्यक्रम को राजनीतिक गोलबंदी या किसी विशेष जातीय एजेंडे के रूप में देखना गलत है।


पीएन पाठक का बयान

विधायक पीएन पाठक ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा:

“जय श्री राम। जय सनातन। जय भाजपा।
सनातन परंपरा में ब्राह्मण को समाज का मार्गदर्शक, विचारक और संतुलनकर्ता माना गया है।
जहाँ ब्राह्मण एकत्र होता है, वहाँ ज्ञान, विवेक और चिंतन का मंथन होता है, जो हिंदू अस्मिता को सशक्त बनाता है।
उसका धर्म समाज को जोड़ना है, विभाजन नहीं।”

उनके इस बयान से साफ है कि वह सहभोज को किसी राजनीतिक लामबंदी से जोड़ने को गलत नजरिए के रूप में देखते हैं।


कार्यक्रम में क्या हुआ था?

सूत्रों के अनुसार, इस सहभोज में
– लिट्टी–चोखा,
– फलाहार
– पारंपरिक भोजन
परोसा गया और इसे विधायकों ने “अनौपचारिक मुलाकात” बताया।

विधायकों का कहना था कि चर्चा का फोकस –
✓ क्षेत्रीय विकास
✓ SIR (सामाजिक–आर्थिक मुद्दे)
✓ संगठनात्मक कार्य
पर था। किसी भी तरह की राजनीतिक रणनीति या जातीय एजेंडा मीटिंग का उद्देश्य नहीं था।


BJP प्रदेश अध्यक्ष ने जताई आपत्ति

लखनऊ में हुए इस आयोजन पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने स्पष्ट कहा:

“जातिगत आधार पर बैठकें या सहभोज पार्टी के संविधान और अनुशासन के खिलाफ हैं।
बीजेपी में संगठन और अनुशासन सर्वोपरि है।”

उनके बयान ने संकेत दिए कि पार्टी शीर्ष नेतृत्व इस तरह की गतिविधियों को लेकर सतर्क है और इसे गुटबंदी के रूप में उभरने नहीं देना चाहती।


सियासी मायने

UP की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक हमेशा निर्णायक रहा है।
कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह कार्यक्रम 2027 की तैयारी, ब्राह्मण ग्लान–फैक्टर की भरपाई या संदेश देने का प्रयास भी हो सकता है – जबकि पाठक और समर्थक विधायक इसे सामान्य धार्मिक–सामाजिक परंपरा बताते हैं।


पीएन पाठक का “जहां ब्राह्मण इकट्ठा होता है…” वाला बयान अब यूपी की राजनीति में बहस का केंद्र बन गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहभोज न तो किसी राजनीतिक गठजोड़ का संकेत है और न ही जातीय लामबंदी, जबकि विपक्ष इसे “बीजेपी की इन–हाउस पॉलिटिक्स” बता रहा है।

BJP में अब नेतृत्व की निगाह इस बात पर है कि क्या यह घटना आगे कोई सियासी क्रैक पैदा करेगी – या केवल एक सामान्य सामाजिक मिलन की तरह इतिहास में दर्ज रह जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *