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Swaraj Times Desk: क्या 25 दिसंबर को नहीं हुआ था ईसा मसीह का जन्म?

25 दिसंबर को पूरी दुनिया में ईसाई समुदाय क्रिसमस का पर्व बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाता है। आम मान्यता है कि यह दिन ईसा मसीह के जन्म की याद में मनाया जाता है। लेकिन मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर के एक बयान ने इस परंपरा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि ऐतिहासिक रूप से ईसा मसीह का जन्म 25 दिसंबर को नहीं, बल्कि किसी और समय हुआ था और क्रिसमस “गलत समय” पर मनाया जाता है।

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित एक अकादमिक चर्चा के दौरान यह मुद्दा सामने आया। यह बहस ‘ईश्वर के अस्तित्व’ जैसे गंभीर विषय पर केंद्रित थी, जिसमें जावेद अख्तर और इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती शमाइल नदवी आमने-सामने थे। चर्चा के दौरान जब धर्म और त्योहारों की सामाजिक भूमिका पर सवाल उठा, तब जावेद अख्तर ने क्रिसमस और ईसा मसीह के जन्म की तारीख को लेकर ऐतिहासिक संदर्भ रखा।

जावेद अख्तर ने अपने तर्क में रोमन साम्राज्य के सम्राट कॉन्स्टेंटाइन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ईसा मसीह के बाद लगभग 400 साल तक ईसाई धर्म के पास उनके जन्म की कोई तय तारीख नहीं थी। चौथी शताब्दी में जब सम्राट कॉन्स्टेंटाइन ने ईसाई धर्म अपनाया, तब एक राजनीतिक और सामाजिक समस्या सामने आई। उस दौर में 17 से 25 दिसंबर के बीच रोमन साम्राज्य में एक बड़ा पगान (गैर-ईसाई) त्योहार मनाया जाता था, जो खासकर बच्चों और आम लोगों में बेहद लोकप्रिय था।

जावेद अख्तर के अनुसार, कॉन्स्टेंटाइन को सलाह दी गई कि यदि ईसाई धर्म अपनाने के बाद यह त्योहार खत्म हुआ तो जनता में असंतोष फैल सकता है। इसी समस्या के समाधान के तौर पर 25 दिसंबर को ईसा मसीह का जन्मदिन घोषित कर दिया गया, ताकि पुराने पगान त्योहार को ईसाई परंपरा में समाहित किया जा सके। अख्तर का दावा है कि ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार ईसा मसीह का जन्म संभवतः मार्च या अप्रैल के आसपास हुआ था, न कि दिसंबर में।

इतिहासकारों और धर्मशास्त्रियों के बीच भी इस मुद्दे पर एकमत नहीं है। बाइबल में कहीं भी ईसा मसीह के जन्म की स्पष्ट तारीख नहीं बताई गई है। केवल इतना उल्लेख मिलता है कि उनके जन्म के समय चरवाहे अपने झुंड के साथ खुले मैदानों में थे, जो आमतौर पर बसंत ऋतु की ओर इशारा करता है। यही वजह है कि कई विद्वान मानते हैं कि उनका जन्म वसंत काल में हुआ होगा।

इतिहास में पहली बार 25 दिसंबर को क्रिसमस मनाने का उल्लेख 336 ईस्वी में एक रोमन कैलेंडर में मिलता है। यानी ईसा मसीह के जन्म के करीब तीन सौ साल बाद यह तारीख प्रचलन में आई। इससे पहले कई जगहों पर 6 जनवरी को उनका जन्मदिन मनाया जाता था। समय के साथ 25 दिसंबर क्रिसमस का सबसे लोकप्रिय और वैश्विक रूप से स्वीकार किया गया दिन बन गया।

जावेद अख्तर का यह बयान धार्मिक भावनाओं पर नहीं, बल्कि इतिहास और तर्क के आधार पर चर्चा को आगे बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है। उनका कहना है कि त्योहारों का महत्व सामाजिक मेल-जोल और खुशी में है, लेकिन उनके पीछे की ऐतिहासिक सच्चाइयों पर सवाल उठाना भी जरूरी है।

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