यूक्रेन युद्ध और वृद्ध होती आबादी ने रूस को बनाया भारतीय युवाओं का नया जॉब हॉटस्पॉट
Swaraj Times Desk: विदेश में रोजगार खोजने वाले भारतीयों के लिए अब खाड़ी देशों के अलावा एक नया गंतव्य तेज़ी से उभर रहा है — रूस। जहां भारत से मजदूरों और तकनीकी कामगारों की मांग तेजी से बढ़ चुकी है। टीवी9 भारतवर्ष की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चार वर्ष में रूस जाने वाले भारतीय कामगारों की संख्या करीब 60% बढ़ी है, जो इस बात का संकेत है कि रूस अब भारतीयों के लिए बड़ा रोजगार बाज़ार बनता जा रहा है।
रूस में अचानक क्यों बढ़ी भारतीयों की डिमांड?
रूस इस समय दो बड़ी समस्याओं से जूझ रहा है —
देश की आबादी तेजी से बुजुर्ग हो रही है
यूक्रेन युद्ध के चलते बड़ी संख्या में युवा सेना में तैनात हैं
रूसी श्रम मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, 2030 तक देश को लगभग 1.1 करोड़ अतिरिक्त कामगारों की जरूरत पड़ेगी, जो रूस की सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती बन चुकी है। पहले रूस मध्य एशियाई देशों से अपने लेबर गैप की भरपाई करता था, लेकिन हालात बदल रहे हैं और अब उसका भरोसा भारतीय श्रमिकों पर बढ़ा है।
साल 2024 में रूस ने लगभग 72,000 भारतीय मजदूरों को वर्क परमिट जारी किए, जिसमें पश्चिम बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से सबसे अधिक लोग शामिल हैं।
50,000 से 1.50 लाख रुपये तक सैलरी – बड़ा आकर्षण
रूस में भारतीय कामगारों को बेहतर नौकरी के साथ आकर्षक पैकेज भी मिल रहे हैं।
भर्ती एजेंसियों के अनुसार—
- शुरुआती मजदूरी: ₹50,000 प्रति माह
- अनुभवी श्रमिकों—वेल्डर, बढ़ई, ड्राइवर, इलेक्ट्रिशियन, रिफाइनरी वर्कर्स—को ₹1,50,000 प्रति माह तक का वेतन
इसके साथ ही कई कंपनियां—
✔ फ्री रहने की सुविधा
✔ खाने का प्रबंध
✔ ओवरटाइम का भुगतान
भी उपलब्ध करा रही हैं।
इसी कारण ब्लू-कॉलर जॉब्स की तलाश करने वाले भारतीय युवाओं के लिए रूस तेज़ी से पसंदीदा स्थान बन रहा है।
किन सेक्टर्स में नौकरी का सबसे ज़्यादा स्कोप?
- कंस्ट्रक्शन (निर्माण कार्य)
- ऑयल और गैस रिफाइनरी
- मैन्युफैक्चरिंग और फैक्ट्री वर्क
- ड्राइविंग और मशीन ऑपरेशन
- इलेक्ट्रिकल और फिटर जॉब्स
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले 2–3 वर्षों में रूस भारतीयों के लिए सबसे बड़े वैकल्पिक जॉब डेस्टिनेशन में शामिल हो सकता है, जो अब तक केवल खाड़ी देशों की ही पहचान थी।
