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राहुल ने हंसकर दी नसीहत – “जो कहना हो पार्टी मंच पर कहो, सोशल मीडिया नहीं” – चाय–नाश्ते के दौरान हुआ सियासी तंज

Swaraj Times Desk: कांग्रेस के स्थापना दिवस (रविवार) के बाद पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन में आयोजित चाय–नाश्ते के कार्यक्रम में एक ऐसा पल देखने को मिला जिसने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
RSS के संगठनात्मक ढांचे की “तारीफ” करने वाले बयान पर घिरे वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का आमना–सामना खुद राहुल गांधी से हुआ, और इसी दौरान राहुल ने मुस्कुराते हुए एक मज़ाकिया–तंज छोड़ दिया।

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने दिग्विजय सिंह से हाथ मिलाते हुए हंसते हुए कहा —

“आपने तो कल काम अच्छा कर दिया।”
वहीं पास खड़े एक सांसद ने चुटकी ली —

“दिग्विजय सिंह साहब बदमाशी कर गए।”

जिस पर राहुल गांधी ने तुरंत ही जवाब दिया —

“बिल्कुल सही कहा, दिग्विजय सिंह जी बदमाशी कर गए।”

यह पूरा संवाद हल्के–फुल्के माहौल में हुआ, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी गहरे माने जा रहे हैं।


सहज बातचीत में दी गंभीर नसीहत

इंदिरा भवन में वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही इस अनौपचारिक बातचीत में सोनिया गांधी समेत कई दिग्गज मौजूद थे।
सूत्र बताते हैं, राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए दिग्विजय को सलाह भी दी —

“जो भी बात हो, पार्टी के आंतरिक मंचों पर रखी जाए… सोशल मीडिया से मुद्दे हल नहीं होते।”

यह वाक्य भले ही हंसी–मजाक के बीच कहा गया, लेकिन माना जा रहा है कि यह राहुल की सीधी चेतावनी थी — कि ऐसी बातें पब्लिक प्लेटफॉर्म पर रखने से पार्टी की छवि प्रभावित होती है।


दिग्विजय सिंह का वायरल पोस्ट

पूरा मामला दिग्विजय सिंह के ट्विटर/X पोस्ट से शुरू हुआ था।
उन्होंने 1990 के दशक की एक पुरानी ब्लैक–एंड–व्हाइट तस्वीर शेयर की —
जिसमें युवा नरेंद्र मोदी, गुजरात में एक कार्यक्रम में एलके आडवाणी के पैरों के पास बैठे दिख रहे हैं।

दिग्विजय ने लिखा —

“जो लोग जमीनी स्तर पर काम करते हैं, वे संगठन के पदानुक्रम में ऊपर बढ़कर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बन सकते हैं। यह संगठन की ताकत है।”

पोस्ट में उन्होंने कांग्रेस के बड़े नेताओं – राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, खरगे, जयराम रमेश को टैग भी कर दिया।
यहीं से विवाद शुरू हुआ — कुछ नेताओं ने इसे “RSS की तारीफ” कहा तो कुछ ने “संगठन की शक्ति का सकारात्मक उदाहरण” बताया।


दिग्विजय सिंह की सफाई – “गलत समझा गया”

बयान पर कांग्रेस के भीतर उठे विरोध के बाद दिग्विजय ने सफाई देते हुए कहा —

“मैं संगठन की ताकत की बात कर रहा था… RSS या मोदी का समर्थन नहीं। मैं आज भी उनका कट्टर विरोधी हूँ, था और रहूँगा।”

उन्होंने यह भी जोड़ा —

“क्या संगठन की क्षमता की तारीफ करना बुरी बात है? मेरी बात को गलत अर्थ में लिया गया है।”


राजनीतिक मायने – कांग्रेस में असहजता साफ

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, राहुल का तंज और दिग्विजय पर बढ़ता दबाव यह संकेत देता है कि कांग्रेस अंदर से “संगठन और विचारधारा” के मुद्दे पर असुरक्षित महसूस कर रही है।
स्थापना दिवस पर ही उठी यह दरार पार्टी की एकता पर बड़ा सवाल भी खड़ा करती है।

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